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Research Shows Why COVID Pneumonia Is More Deadly

  TUESDAY, Jan. 12, 2021 (HealthDay News) -- Unlike regular   pneumonia , COVID-19 pneumonia spreads like many "wildfires" throughout the lungs, researchers say. This may explain why COVID-19 pneumonia lasts longer and causes more harm than typical pneumonia, according to the researchers at Northwestern Medicine in Chicago. The research team said that their aim is to make COVID-19 more like a bad cold. For the study, the team analyzed immune cells from the lungs of COVID-19 pneumonia patients and compared them to cells from patients with pneumonia caused by other viruses or bacteria. While other  types of pneumonia  rapidly infect large regions of the lungs, COVID-19 begins in numerous small areas of the lungs. It then uses the lungs' own immune cells to spread across the lungs over many days or even weeks. This is similar to how multiple wildfires spread through a forest, the study authors explained. As COVID-19 pneumonia slowly moves through the lungs, it leaves da...

Vote Earth

शख्सियत : डेनिस एलन हायेस उन्तीस अगस्त उन्नीस सौ चौवालिस को अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य में जन्में डेनिस एलन हायेस हमारे वक्त के एक नामचीन पर्यावरण विज्ञानी एवं पर्यावरण पारिस्थितिकी एक्टिविस्ट हैं आपने अपना सारा जीवन मानव -पारितंत्र ,उद्योगिक पारिस्थितिकी के बारे में जागरूकता पैदा करने में लगा दिया है। आप पृथ्वी दिवस त्यौहार के सह -जन्मदाता हैं।आप वैकल्पिक ऊर्जा मामलों के माहिर हैं। आपने जिस महायज्ञ की शुरुआत की उसका ही  सहज प्रतिफल  था 'पृथ्वी दिवस'।बेशक इसके निमित्त बने एक अमरीकी सीनेटर।  पहला पृथ्वी पर्व २२ अप्रैल १९७० को मनाया गया। आज दुनियाभर  के तकरीबन एक सौ अस्सी मुल्क पृथ्वी के पर्यावरण ,पारितंत्रों ,हमारी हवा -पानी -मिट्टी की गुणवत्ता को बनाये रखने के महायज्ञ में अपनी -अपनी आहुति डाल रहें हैं तो इसका श्रेय आपको और सिर्फ आपको ही जाता है । अमरीकी  विश्वविद्यालयीय परिसरों में हमारी युवा भीड़ का ध्यान इस ओर  खींचने में आपका अप्रतिम योगदान रहा है। नारी विमर्श ,राजनीति आदि से युवा भीड़ को निकालकर पर्यावरण पारितंत्रों स...

Tonic water and zinc cure Covid-19:Myth and or Reality (HINDI )

विश्व महामारी कोविड-१९  के गिर्द जनआस्था (मिथ )और यथार्थ -पहली क़िस्त मिथ : टॉनिक वाटर कोविड -१९ विश्व आपदा से राहत दिलवा सकता है यथार्थ :यह महज़ खामख्याली विशफुल थिंकिंग है। टॉनिक वाटर में भले क्विनीन और हाड्रोक्सी क्लोरोक्विन का अल्पांश मौज़ूद होता है। सम्भव हैं यहीं से यह जनविश्वास पैदा हुआ है जिसे डॉ. ट्रम्प ने प्रकारांतर से हाइप किया है. एक लीटर टॉनिक वाटर में जो अमरीका में बिक रहा है मात्र ८३ मिलीग्राम क्विनीन ही है। जबकि मलेरिया में दी जाने वाली क्विनीन की एक गोली में इसकी मात्रा ३२४ मिलीग्राम होती है। यह गोली आठ घंटे बाद दोबारा दी जाती है। जबकि क्विनीन और  हाया -ड्रोक्सी -क्लोरो -क्वीन की कोविड -१९ के खिलाफ असर कारिता  के भी कोई प्रामाणिक पक्ष भी सामने नहीं आये हैं। ज़ाहिर है हाइप किये गए टॉनिक वाटर में क्विनीन की मात्रा का दवा के रूप में इस्तेमाल किसी काम का नहीं है। यहां यह भी बत्लादें कुछ लोग ज़िंक को  भी इस माहामारी (विश्वमारी )के खिलाफ आज़मा रहे हैं थेंक्स टू फेसबुक शोशल डॉक्टर्स की एक नै पौध पैदा हो गई है जिसका नेतृत्व डॉ. ट्रम्प कर रहें हैं। ...

विज्ञान का कृष्ण पक्ष :Cimate Emergency

 Climate Change a Myth and Or Realty ?    विज्ञान का कृष्ण पक्ष  बिला शक जलवायु परिवर्तन हमारी हवा ,पानी और मिट्टी में मानवीयक्रियाकलापों (करतूतों और कुदरत के साथ किये गए हमारे सौतिया व्यवहार )द्वारा पैदा बदलाव की गवाही दृष्टा भाव से देखे जाने के साक्षी एकाधिक संस्थान सरकारी गैरसरकारी संगठन बन रहे हैं। इनमें शरीक हैं : (१ )इंटरगावरनमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज बोले तो जलावायु में आये बदलाव से सम्बद्ध  अंतर् -सरकारी (शासकीय) पैनल (२ )जैव वैविध्य और पारि -तंत्रीय सेवाओं से जुड़ा - इंटरगावरनमेंटल साइंस पॉलिसी प्लेटफॉर्म  (३ )जलवायु केंद्रीय जन-नीति  शोध संस्थान इत्यादि सभी ने समवेत स्वर एकराय से साफ -साफ़ माना है और बूझा भी है ,हमारा प्रकृति प्रदत्त पर्यावरण तंत्र  कुदरती (प्राकृत हवा पानी मिट्टी ) और तमाम पारितंत्र (इकोलॉजिकल सिस्टम्स )एक- एक करके लगातार दरकते -टूटते रहें हैं। इनके खुद को बनाये रखने ,साधे रहने की संतुलित बने रहने की कुदरती कूवत चुक गई है। इसी के चलते अनेक प्राणी -प्रजातियां अब विलुप्त ...

15 Amazing Benefits & Uses Of Sapodilla / Chikoo

Image: Shutterstrock Sapodilla, mainly known as Chikoo in the Indian sub continent, is a member of the Sapotaceae family in Central America. In Mexico, sapodilla is grown commercially for making chewing gum. The consumption of sapodilla is recommended in herbal medicine as it has an uncountable number of medicinal uses. The sapodilla fruit is brown in color. It has a kiwi fruit-like texture but the outer surface is without any fuzziness. The pulp of the fruit is unripe with sticky latex called saponin. As Sapodilla ripens later on, the white latex gradually disappears. Sapodilla contains three to five black, smooth, shiny, bean-shaped inedible seeds located at the center of the fruit.  The taste of Sapodilla is nice and it can be compared to some extent to pears.   Types of Sapodilla or Sapota: 1. Brown Sugar: This member of the Sapodilla family was introduced in 1948. This version is granular, fairly sweet, lu...

Sedative addiction and anxiety on the rise among children, reports show(hindi )

88% of calls made to Childline about anxiety were from girls, the group said. भय ,चिंता या अनिश्चय की भावना विशेषतया भविष्य के प्रति आधुनिक जीवन  शैली की दाय एंग्जायटी (बे -कली,बे -चैनी ,ओतुसुक्य ,आतुरता )कहलाती है।  कुछ दवाएं होती हैं नशीले पदार्थ होते हैं जिनका इस्तेमाल इसके प्रबंधन में किया जाता है इन्हें चित्त शामक या सिर्फ शामक (सेडेटिव )कह दिया जाता है। लेकिन यही एक किस्म की नशीली दवाएं जब आदतन खाने से लत पड़  जाने पर खुद रोग बन जाएँ तब क्या कीजियेगा ? ब्रितानी नौनिहालों की आज यही दुरावस्था है खासकर किशोरियां इसकी लपेट में ज्यादा आ रहीं हैं। पढ़िए ये रिपोर्ट क्यों हो रहा है ऐसा ? इस स्थिति से निजात दिलवाने के लिए सलाह मशविरा देने वाली ब्रितानी संस्था एनएसपीसीसी (फोन पर बालकल्याण हेतु सलाह मशविरा देने वाली यह राष्ट्रीय सेवा है  )मौजूद है।  बकौल इस संस्था के २०१७ में २०१६ की वनिस्पत ५५ फीसद अधिक नौनिहाल इस सेवा का लाभ लेने के लिए फोन पर आगे आये। प्रत्येक दस काल में से नौ काल किशोरियों के थे।  अलावा इसके इसी बर...

हम हैं तुम्हारे तलब -दार हो जनाबे पिज़्ज़ा , हम को तुमसे है प्यार ओ ललकऊ पिज्जा।

हम हैं तुम्हारे तलब -दार हो जनाबे पिज़्ज़ा , हम को  तुमसे है प्यार  ओ ललकऊ  पिज्जा।  माहिरों के अध्ययन में पिज़्ज़ा को सबसे तलबी खाद्य माना गया है ,इसका चस्का लग जाता है ललक पैदा होने लगती है ललचाने लगता है लती कारक पिज़्ज़्ज़ा आखिर क्यों ?आइये सरसरी तौर पर ज़ायज़ा लेते हैं : इसमें मौजूद धुर (शीर्ष )अवयवों को देखिये -एक छोर पर इसमें वसा (चिकनाई ,फैट )है ,शक्कर (शुगर )है ,नमकीनियत  के लिए नमक है।यही तिकड़ी दिमागी कोशिकाओं के एक समान गुणधर्मा समूह -न्यूरानों को पुरुस्कृत करके तृप्ति का एहसास हम तक पहुंचाती है।  पिज़्ज़ा की ऊपरी तह का कुर -कुरापन ,चीज़ का नरम और चिपचिपा होना ,सॉस का लेसदार होना मिलकर इसे एक ख़ास सेवरि स्वाद और खुश्बूओं   से भर देते हैं। दिल और दिमाग दोनों को खुश मिज़ाज़ बना देता है यह स्वाद। उल्लेखित खाद्य तिकड़ी में चीज़ तो अपनी जगह  खुद ही तलब पैदा करने वाली शै है फिर इसका ब्रेड और सॉस संग  मेल इसे चस्के तक ललक तक ले आता है।  पिज़्ज़ा -हट में ओवन से  उठती हुई खशबूएं नथुनों को वैसे ही भर देतीं हैं जैसे कॉफी बीन्स की ...